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किसी विधेयक को धन विधेयक कैसे और कब परिभाषित किया जा सकता है?

किसी विधेयक को धन विधेयक कैसे और कब परिभाषित किया जा सकता है?
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किसी विधेयक को धन विधेयक कैसे और कब परिभाषित किया जा सकता है?

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने धन विधेयक को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की है।

प्रसंग:

  • वर्ष 2016 में पारित आधार अधिनियम की जांच के दौरान अध्यक्ष द्वारा किसी विधेयक को 'धन विधेयक' के रूप में प्रमाणित करना न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत आया।

धन एवं वित्तीय विधेयक

  • संविधान में वित्तीय मामलों से संबंधित विधेयकों की कुछ श्रेणियों को धन विधेयक और वित्तीय विधेयक के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 110(1)(a) से (f) धन विधेयक को ऐसे विधेयक के रूप में परिभाषित करता है जिसमें 'केवल' छह विशिष्ट विषयों में से एक या अधिक से संबंधित प्रावधान होते हैं।
  • ये कराधान, सरकार द्वारा उधार लेने, समेकित निधि या आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा और ऐसी निधि से धन का भुगतान/निकासी, समेकित निधि से विनियोजन, समेकित निधि पर लगाया गया व्यय, समेकित निधि या लोक लेखा से प्राप्तियां या संघ या राज्यों के खातों की लेखापरीक्षा से संबंधित हैं।
  • अनुच्छेद 110(1) के खंड (g) में प्रावधान है कि इन छह विषयों से संबंधित कोई भी विषय धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
  • धन विधेयक के क्लासिक उदाहरणों में वित्त अधिनियम और विनियोग अधिनियम शामिल हैं, जो मुख्य रूप से क्रमशः 'केवल' कराधान और समेकित निधि से व्यय से संबंधित हैं।
  • अनुच्छेद 117 में वित्तीय विधेयकों की दो अलग-अलग श्रेणियों का प्रावधान है।
  • श्रेणी I में अनुच्छेद 110(1)(a) से (f) में उल्लिखित छह विषयों में से कोई भी विषय तथा कोई अन्य विषय शामिल है।
  • श्रेणी II विधेयकों में इन छह विषयों में से कोई भी विषय शामिल नहीं है, लेकिन इसमें समेकित निधि से व्यय शामिल होगा।

धन विधेयक के लिए प्रक्रिया

  • अनुच्छेद 109 के अनुसार, धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जाएगा।
  • लोकसभा में पारित होने के बाद, राज्य सभा के पास ऐसे विधेयक पर अपनी सिफारिशें देने के लिए केवल 14 दिन का समय होता है, जिसे लोकसभा द्वारा स्वीकार किया भी जा सकता है और नहीं भी।
  • यह अवधारणा वास्तव में ब्रिटेन से ली गई है।
  • लोक सभा अध्यक्ष ही किसी विधेयक को धन विधेयक के रूप में प्रमाणित करता है।
  • श्रेणी I और II के वित्तीय बिलों पर यह विशेष प्रक्रिया लागू नहीं होती।

समस्याएँ

  • वर्ष 2016 में पारित आधार अधिनियम की जांच के दौरान अध्यक्ष द्वारा किसी विधेयक को 'धन विधेयक' के रूप में प्रमाणित करना न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत आया।
  • इस कानून में नामांकन और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया, आधार के लिए प्राधिकरण की स्थापना, सुरक्षा उपायों के लिए तंत्र और अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दंड के संबंध में प्रावधान शामिल हैं।
  • अधिनियम की धारा 7 में प्रावधान है कि केन्द्र या राज्य सरकार सब्सिडी, लाभ या सेवा प्रदान करने के लिए किसी व्यक्ति के आधार प्रमाणीकरण की आवश्यकता कर सकती है, जिसके लिए समेकित निधि से व्यय किया जाता है।
  • समेकित निधि से धन निकालने को अधिनियम का प्राथमिक उद्देश्य बताते हुए, अन्य सभी प्रावधानों को इसके अनुषंगी मानते हुए, इस कानून को 'धन विधेयक' के रूप में पारित किया गया।
  • यद्यपि यह एक बहस योग्य वर्गीकरण था, परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने 4:1 के बहुमत से इसे बरकरार रखा।
  • वित्त अधिनियम, 2017 और भी अधिक विवादास्पद रहा, जिसमें राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसे अधिकरणों के पुनर्गठन के लिए विभिन्न अधिनियमों में संशोधन को धन विधेयक के रूप में पारित किया गया।
  • इन संशोधनों को रोजर मैथ्यू बनाम साउथ इंडियन बैंक (2019) में खारिज कर दिया गया था, जिसमें पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि आधार मामले के फैसले में धन विधेयक की परिभाषा में 'केवल' शब्द के प्रभाव पर पर्याप्त चर्चा नहीं की गई थी।
  • उसने मामले को विचारार्थ एक बड़ी पीठ को भेज दिया।

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