बुंदेलखंड के लिए सोयाबीन की उन्नत किस्में
| वर्ग | विवरण |
|---|---|
| घटना/आयोजन | खरीफ 2025 सीजन से पहले बुंदेलखंड क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) के लिए अनुशंसित उच्च उपज देने वाली सोयाबीन किस्में. |
| मुख्य किस्में | स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों (बारिश, मिट्टी, तापमान) के लिए उपयुक्त केंद्रीय रूप से अधिसूचित किस्में. उत्तर प्रदेश के लिए कोई राज्य-विशिष्ट किस्में नहीं हैं. |
| क्षेत्रीय उपयुक्तता | मध्यम से गहरी काली मिट्टी और मानसून पर निर्भर वर्षा के लिए अनुकूलित. |
| प्रमुख सोयाबीन राज्य | मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात - वैश्विक उत्पादन का ~4% योगदान करते हैं. |
| सोयाबीन के लाभ | जल-कुशल, कम इनपुट लागत, मृदा नाइट्रोजन संवर्धन, फसल विविधीकरण (जैसे, सोयाबीन-गेहूं फसल चक्र), भोजन/पशुधन/औद्योगिक उपयोग के लिए उच्च प्रोटीन/तेल सामग्री. |
| ख़रीफ़ फ़सलें | जून-सितंबर (मानसून) में बोई जाती है, अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती हैं. उदाहरण: धान, मक्का, मूंगफली, कपास. |

