'शासन के लिए एआई के उपयोग में चुनौतियों का सामना करने के लिए वैश्विक सहमति आवश्यक'
- कॉपीराइट, डेटा सुरक्षा और साइबर भेद्यता मुद्दों जैसी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग के लिए विनियम तैयार करने में वैश्विक सहमति की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु:
- 21 नवंबर को चेन्नई में आयोजित हिंदू AI शिखर सम्मेलन 2024 में नीति निर्माताओं, AI विशेषज्ञों और उद्योग के नेताओं ने शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम में कॉपीराइट, डेटा सुरक्षा और साइबर भेद्यता जैसे मुद्दों को संबोधित करने के लिए AI विनियमों पर वैश्विक सहमति की आवश्यकता पर जोर दिया गया, साथ ही विविध क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोग की खोज की गई।
पैनल चर्चा से मुख्य अंतर्दृष्टि
AI-संचालित शासन: तमिलनाडु से सफलता की कहानियाँ
- सार्वजनिक स्वास्थ्य में AI
- तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू ने तपेदिक का पता लगाने में AI की भूमिका पर प्रकाश डाला।
- पहल: डिजिटल एक्स-रे मशीनों और AI उपकरणों के साथ मोबाइल वैन।
- परिणाम: 56,000 से अधिक लोगों की जांच की गई, जिसकी पहचान दर पारंपरिक तरीकों से दोगुनी प्रभावी रही।
संभावित क्षेत्र:
- बच्चों में अपवर्तक नेत्र त्रुटियों की जांच।
- मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए गर्भावस्था-प्रेरित उच्च रक्तचाप (PIH) का प्रारंभिक पता लगाना।
- AI के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण:
- कोयंबटूर के मदुक्कराई वन रेंज में AI-सक्षम थर्मल कैमरों ने रेलवे पटरियों पर हाथियों की मौतों को सफलतापूर्वक टाला है।
- तंत्र: जब हाथी रेलवे लाइन पार करते हैं तो लोको पायलटों को वास्तविक समय में अलर्ट।
- प्रभाव: हजारों हाथियों की जान बच गई।
AI अवसंरचना और सुरक्षा उपायों का निर्माण:
- IIT मद्रास के बी. रविंद्रन ने शासन में AI की प्रभावशीलता के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया।
- सभी शासन समस्याओं के लिए AI की आवश्यकता नहीं होती है - समाधान समस्या-विशिष्ट होने चाहिए।
- AI प्रणालियों में भाषा और क्षेत्रीय बारीकियों सहित भारत की सांस्कृतिक विविधता को शामिल किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय प्रयास:
- केंद्र सरकार पक्षपात को दूर करने और निष्पक्ष कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक AI सुरक्षा संस्थान स्थापित करने की योजना बना रही है।
वैश्विक और भारतीय AI नेतृत्व:
- फर्स्टसोर्स के हसित त्रिवेदी ने यू.एस. और चीन के साथ वैश्विक AI नेता बनने की भारत की क्षमता को रेखांकित किया।
- चुनौतियाँ: जनरेटिव AI नए जोखिम पेश करता है, जैसे कॉपीराइट उल्लंघन और डेटा का दुरुपयोग।
समाधान:
- भारत की डिजिटल संप्रभुता की रक्षा के लिए डेटा स्थानीयकरण सुनिश्चित करें।
- विदेशी AI तकनीकों पर निर्भरता से बचें, जिससे "डिजिटल गुलाम" बनने का जोखिम कम हो।
AI की सफलता की कुंजी के रूप में डेटा:
- हेक्सावेयर के एस. थमराइसेल्वन ने AI सटीकता के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले, स्थानीयकृत डेटा के महत्व पर जोर दिया।
- जनरेटिव AI के लिए भारत के मजबूत उपभोक्ता आधार का उपयोग स्वदेशी AI समाधान बनाने के लिए किया जा सकता है।
- भारत के अद्वितीय शासन और सांस्कृतिक आवश्यकताओं के अनुकूल तकनीक बनाने पर प्रयासों को केंद्रित किया जाना चाहिए।
कार्रवाई का आह्वान: AI के उपयोग का विस्तार
- प्रस्तावित भविष्य के अनुप्रयोग:
- सार्वजनिक सेवा वितरण में वृद्धि।
- जलवायु कार्रवाई और आपदा प्रबंधन।
- शिक्षा और कौशल विकास।
- चुनौतियाँ:
- यह सुनिश्चित करना कि AI मॉडल निष्पक्ष, निष्पक्ष और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील हों।
- शासन में AI के नैतिक उपयोग के लिए वैश्विक ढाँचे बनाना।
प्रीलिम्स टेकअवे
- एआई संचालित शासन - संकल्पना
- तमिलनाडु टेक्नोलॉजी हब (iTNT)

